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Monday, 18 March 2019

चिंता क्यों करते हो, समाधान है ना!

            

चिंता क्यों करते हो, समाधान है ना!

" जीवन में कठिनाइयां हमें बर्बाद करने नहीं आती है, यह हमारी छुपी हुई सामर्थ्य और शक्तियों को बाहर निकलने में हमारी मदद करती है! कठिनाइयों को यह जान लेने दो कि आप उससे भी ज्यादा कठिन है!"

      चिंता करना आधुनिक जीवन का एक हिस्सा बन गया है, जबकि कुछ मामलों में तनाव लेना निश्चित है लेकिन जब चिंताएं बढ़ने लगती है तो हमें उनका सामना करने की आवश्यकता होती है! आम तौर पर देखा जाता है कि अधिक चिंताएं उन लोगों में ज्यादा देखने को मिलती है जिन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने में परेशानी हो रही है! किसी परेशानी के आने से पहले ही उस पर ध्यान देकर खुद को  उस से मुक्त कर ले! ऐसा इसलिए, क्योंकि जो हो  ही नहीं सकता,  उसके बारे में चिंता करके  समय नष्ट करने का क्या अर्थ है!

  दरअसल, जो हो चुका है उसके बारे में चिंता करने के बजाय उससे सबक लेकर  खुद को इस चिंता के दलदल से बाहर निकालना ही बुद्धिमानी है! ज्यादा चिंता करने वाला व्यक्ति स्वभाव से चिड़चिड़ा हो जाता है और बात -बात पर  क्रोधित हो जाता है! इसलिए बीती बातों को ही अपनी ताकत बना कर इन चिंताओं से लड़े! इस तरह हम अपने चिड़चिड़ा स्वभाव  को खत्म कर खुद को खुश मिजाज बना सकते हैं!


 हममें से ज्यादातर लोग रोज मरजा की छोटी-छोटी बातों की चिंता में रोज ना जाने कितना समय नष्ट कर देते हैं! ऐसी दुविधाओं के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए, क्योंकि यह कभी भी सामने  आ सकती है! कहते हैं कि सुख  व  दुख दोनों ही  हमारे साथी होते हैं! किसी भी परेशानी पर चिंता करने के बजाय, उसे किसी ऐसे इंसान के साथ बांटे जो आपकी परेशानी को समझ कर न केबल हमारी चिंता को  कम कर सके, बल्कि हमें उस परेशानी से बाहर निकलने का आसान सा रास्ता भी बता सके!


   जब कोई चिंता सताने लगे, तो अपने आपको ज्यादा से ज्यादा व्यस्त रखें! खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से किसी काम  मैं व्यस्त रखते हैं,  तो आपके पास चिंता के लिए फालतू समय नहीं बचेगा!



        
 जब भी कोई  चिंता सताने लगे तो उस बदतर परिस्थिति को भी याद करें, जिसमें हम सबसे ज्यादा परेशान थे! उस परिस्थिति से कैसे हमने सबसे पहले क्या किया? इस तरह पुरानी यादों को समेटने से हमको वर्तमान परिस्थिति से निकलने का रास्ता खुद-ब-खुद दिख जाएगा, जो की चिंता करने से कभी नहीं मिल सकता!

     यह भी सच है कि जो होना है, वह होकर रहेगा! फिर उस पर चिंता क्यों करें! सिर्फ उसे और बेहतर बनाने के लिए प्रयास कर सकते हैं! इस तरह हम अपनी चिंता को कम तो कर ही सकते हैं, साथ ही अपने दिमाग को शांत रखकर उसे किसी ऐसे काम के लिए तैयार कर सकते हैं जिससे कि यह चिंता पास भटकने ही ना सके! इसलिए चिंतन मनन करें, चिंता नहीं!

 इसलिए, अगर आप उन बातों और परिस्थितियों  की वजह से चिंतित हो जाते है, जो आपके नियंत्रण में नहीं है तो इसका परिणाम समय की बर्बादी एवं पछतावा है!

 ( BEST OF LUCK FOR THE NEW LIFE )

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