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Saturday, 11 May 2019

उम्मीद पर तो दुनिया टिकी है!


उम्मीद पर तो दुनिया टिकी है!

" भाग्य से जितनी अधिक उम्मीद करेंगे वह उतना ही निराश करेगा! कर्म में जितना विश्वास रखेंगे वह उतना ही आपको आपकी उम्मीद से अधिक देगा!"
         
 आज का " टॉपिक " बहुत ही खास वजह से लिखा गया है जो कि युवाओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है, जो थोड़ी सी समस्या आने पर विचलित हो जाते हैं! इसलिए युवा वर्ग से आग्रह है कि किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए मेहनत और लगन के साथ-साथ आशावादी होना भी जरूरी है!
            
सफलता केवल लक्ष्य निर्धारित कर कड़ी मेहनत करने से ही नहीं मिलती बल्कि इसके लिए आवश्यक है कि असफलताओं के बावजूद 'जोश' में कोई कमी ना आए! खुद की काबिलियत पर भरोसा और मन में यह विश्वास हो कि भले ही  कितनी भी कठिनाइयां क्यों ना आए लेकिन मंजिल एक ना एक दिन हमारे कदम जरूर चूमेगी और ऐसी स्थिति में मंजिल आप के बेहद करीब होगी!
     
एक पुरानी कहावत है कि " उम्मीद पर तो दुनिया कायम है! " दरअसल दुनिया ही नहीं बल्कि हमारा पूरा वजूद भी इससे प्रभावित होता है! मां-बाप बच्चे का पालन पोषण इसी उम्मीद में करते हैं कि वह एक दिन इस लायक बनेगा कि उस पर उनको नाज हो! स्टूडेंट परीक्षा देते हैं, तो उनका यही उम्मीद होता है कि वह अच्छे अंको से पास हो जाएंगे! यानी हर जगह मेहनत के साथ उम्मीद भी जुड़ी होती है!


       
उम्मीद इंसान को नकारात्मक विचारों से बचाती है! संभव है कि किसी काम या मेहनत का परिणाम आप की उम्मीद के मुताबिक ना निकले लेकिन यदि आप आशावादी हैं तो नकारात्मक विचारों से बचते हुए दुगने उत्साह के साथ फिर से अपने कार्य में जुट जाएंगे! आज के अधिकतर युवा फटाफट सफलता चाहते हैं! असफलता मिली नहीं कि वे निराश हो जाते हैं! उनके मन में नकारात्मक विचार इस कदर हावी हो जाते हैं कि दिल और दिमाग एक साथ काम ही नहीं करते!

 परिवार के सदस्यों द्वारा भी उनको दिलासा या ऐसी शिक्षा नहीं मिलती की ' कोई बात नहीं अगली बार तुमको कामयाबी मिल जाए!' दरअसल होता इसके विपरीत है कि फलां का बेटा या बेटी तो वहां पहुंच गए और एक तुम अपने आप को देखो! 


दरअसल ऐसी परिस्थितियां बहुत ही घातक होती है और युवा उम्मीद का दामन थाम दुगने उत्साह से कोशिश करने के बजाय आत्मघाती कदम उठा लेते हैं इसलिए परिवार के सदस्यों से आग्रह है कि युवाओं से इस प्रकार की नकारात्मक बातें ना करें!
         
यदि किसी के हिस्से में कड़ी मेहनत के बाद भी असफलता आती है तो इसका यह मतलब नहीं कि उसमें लगन और आत्मविश्वास की कमी है या फिर उसमें अपने लक्ष्य को हासिल करने का दम नहीं था! दरअसल सफलता के पीछे कई परिस्थितियां जिम्मेदार होती हैं! 

आप की नाकामयाबी इस बात का एहसास कराती है कि आप में कहीं कुछ कमी रह गई! यदि आप इसे सही कर ले, तो कोई शक नहीं कि अगली बार  आपके चेहरे पर मुस्कान खिली हो! लेकिन ऐसा तभी हो सकता है जब आप आशावादी हो और असफलता के बावजूद आप के हौसले में कहीं कोई कमी ना आई हो!



      दोस्तों, मुश्किलों में अगर पूरी दुनिया आपका साथ छोड़ दे, तो इससे आपकी असफलता निश्चित नहीं होती है बल्कि आपकी असफलता तब निश्चित होती है जब आप निराश होकर हाथ पर हाथ रख कर बैठ जाते हैं!
                                     
   ( Best of Luck For The New Life )
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