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Saturday, 4 May 2019

जीवन में " चुनौतियां " आवश्यक है!

जीवन में " चुनौतियां " आवश्यक है!

"  किसी भी समस्या से बाहर आने के लिए आपके अंदर ' धैर्य और विश्वास '  का होना अति आवश्यक है! साथ ही आपका 'honest' होना भी जरूरी है  और किसी भी समस्या को आप जितनी जल्दी सुलझाने की कोशिश करेंगे उतनी जल्दी आप समस्या से निजात  पाएंगे! "

मनुष्य के मन में दो शक्तियां निवास करती है- 'भय और विश्वास'! यह दोनों शक्तियां मनुष्य  की विचार धारा पर नियंत्रण पाने के लिए निरंतर एक दूसरे से संघर्ष करती रहती है किंतु इन दोनों में विश्वास की जड़े बहुत गहराई लिए होती है!
       
कहा जाता है कि विश्वास में महान शक्ति निहित होती है! चाहे विश्वास किसी अदृश्य शक्ति के प्रति हो या अपने प्रति, विश्वास शरीर की ऊर्जाओं को मुक्त कर देती है जिससे  हमें निर्णय करने की क्षमता प्रदान होती है! अगर आपके भीतर कोई कमजोरी है, तो उसे तलाश कर और जितनी जल्दी हो सके उससे छुटकारा पाने की कोशिश करें! हो सकता है कि कोई चुनौती आपको बहुत भारी लगे, फिर भी हार न माने! अपनी शक्तियों को जगाए तथा अपने भीतर यह जिद पैदा करें कि 'और कोई ऐसा कर सकता है तो मैं क्यों नहीं कर सकता!'
          
      हम दर्पण के सामने खड़े होकर अपने स्वाभिमान को जगाएं, स्वयं को चुनौती दीजिए तथा स्वयं विचार कीजिए कि आप में कमी क्या है आप क्या नहीं कर सकते? आपके पास मस्तिष्क है उनमें अनंत शक्ति है, आप जो चाहे वह कर सकते हैं! नियमित रूप से विचार करने की इस क्रिया को दोहराते रहें! आप देखेंगे कि आप में विश्वास की वृद्धि हो रही है! असफलता या सफलता एक मानसिक स्थिति है इसे स्वीकारना या नकारना पूरी तरह आपके वश में हैं!


    
 सर्वप्रथम आप अपनी 'Thought' (शंका) का समाधान कीजिए, ऐसा कभी मत सोचिए कि यदि आप ऐसा करेंगे तो लोग आपको अल्प बुद्धि समझेंगे! ऐसा करने से आपके ज्ञान में वृद्धि होगी और ज्ञान में वृद्धि होने से आप के विश्वास में वृद्धि होगी! 

किसी भी कार्य में पूरी लगन के साथ लग जाना ही सफलता की पहली शर्त है! यदि आपने अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए कार्य में पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करने की शर्त पूरी कर ली तो निश्चित रूप से  जान ले की आपकी सफलता के मार्ग में व्यवधान उपस्थित नहीं होंगे!

  
आप में क्या कमियां हैं, इसका ज्ञान आपको होना चाहिए! इस बात का ज्ञान तभी संभव है जब आप स्वयं का परीक्षण नियमित रूप से करेंगे! आप देखेंगे कि ऐसा करने से आपके व्यक्तित्व में एक निखार पैदा होती है! निखार आपको क्षण-क्षण पर आपको चौका देती है! 

यदि आप कहीं भूल कर रहे होते हैं तो आपको स्वत: इस बात की जानकारी हो जाती है कि कहां भूल हो गई! भूल का ज्ञान होने पर आप उसे सुधार भी सकते हैं! इस प्रकार आपका व्यक्तित्व 'स्वयं' निखर जाता है किंतु व्यक्तित्व की इस निखार के लिए आपको निरंतर प्रयास करना होगा!


          आपका व्यक्तित्व दर्पण है आप इसमें जितना देखेंगे उतना ही वह आकर्षक बनेगा! आप दर्पण को जितना साफ करेंगे वह उतना ही चमकेगा और उसमें आपकी छवि उतना ही स्पष्ट दिखाई देगी, ठीक यही स्थिति आपके व्यक्तित्व की है आप इसे जितना सवारंगे वह उतना ही आकर्षक बनेगा!  


" व्यक्तित्व की सभी जगह रक्षा और सम्मान करना चाहिए क्योंकि वह सभी अच्छाइयों का आधार है! अतः दोस्तों आप अपने व्यक्तित्व को  निखारें और उसे आकर्षक बनाएं!"

                                      
  ( Best of Luck  for the new Life )
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