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Monday, 24 June 2019

अपना कर्म करो, परिणाम की चिंता ना करो!

 

अपना कर्म करो, परिणाम की चिंता ना करो!

" पृथ्वी पर ऐसी कोई भी व्यक्ति नहीं है जिसको समस्या ना हो और कोई ऐसी समस्या नहीं है जिसका समाधान ना हो, मंजिल चाहे कितनी भी ऊंची क्यों ना हो उसके रास्ते हमेशा पैरों के नीचे से ही जाते हैं! "

जीवन की राह समतल नहीं होती है बल्कि उबड़-खाबड़ होती है! यूं कहें तो सख्त और दुष्कर होती हैं! हम सभी जानते हैं कि सफलता इस रास्ते से गुजर कर ही पाई जा सकती है! 'आइंस्टीन से लेकर महात्मा गांधी' तक इतिहास इस बात का गवाह है कि जिसने भी मनोयोग से कर्म किया वह सफल हुआ है और जिसने उसकी निरंतरता को बनाए रखा  उसने ऊंचाइयों को छुआ है! 

यह अजीब विडंबना है कि आधुनिक युग में व्यक्ति सजग  होते हुए भी प्रकृति की मूलभूत स्वभाव को नहीं समझ पाता जैसे कि सूरज और चांद किस तरह लगातार अपने कर्म का पालन करते हैं यह सच्चाई को जान कर भी इंसान नहीं समझ पाता! ऐसा इसलिए होता है कि उसने आलस्य को अपना कर स्वयं को अंदर से खोखला कर लिया है!

      
प्रतियोगिता के इस माहौल में हमारे द्वारा किया गया निरंतर प्रयास ही हमारे कर्म की गुणवत्ता को बढ़ाता है! उसकी छवि को एक व्यापक झलक देता है तथा व्यक्ति को यह भी समझना चाहिए कि लक्ष्य छोटा हो या बड़ा उसे पाने के लिए एकाग्रचित्त मानसिक स्थिति की आवश्यकता होती है! कर्म की प्रकृति किसी भी तरह का भटकाव स्वीकार नहीं करता फोकस के साथ की गई तैयारी ही हमें सफलता तक पहुंचा सकता है और हम तभी जाकर स्वयं की एक मजबूत छवि बना सकते हैं!


      
भले ही जीवन समस्याओं का नाम हो पर हमारे द्वारा किया गया कर्म ही उसका वास्तविक समाधान है, तो फिर क्यों व्यक्ति चाहकर भी बहुत कुछ नहीं कर पाता! 
       
 ऐसा इसलिए होता है कि आज के परिवेश में व्यक्ति की अकर्मण्यता ही उसका वास्तविक चरित्र होता जा रहा है! आराम फरमाना और खाली सोचना ही उसकी दिनचर्या होता जा रहा है! कुछ पाना चाहता है लेकिन वह बिना कर्म के सब कुछ पाना चाहता है! यही मानसिकता उसको 'डाउटफुल' बनाता है और वह कर्म नहीं बल्कि भाग्य से ज्यादा प्रभावित होने लगता है!
        
 इतना ही नहीं बहुत से लोग तो कार्य से ज्यादा फल पर आंखें गड़ाए रहते हैं! कुछ सीखने के बजाय दूर भागने लगते हैं तथा जल्द से जल्द सफलता पाना चाहते हैं जो कभी संभव नहीं होता है! अगर किसी कारण से सफलता प्राप्त हो भी जाता है तो वह स्थाई नहीं होता है! इसलिए हमें स्वीकार करना होगा कि कर्म ही सफलता का मूल मंत्र है!
                                     
    ( Best of Luck for the new life. )
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