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Wednesday, 7 August 2019

जीवन में आगे बढ़ना है तो सहयोग की भावना रखें!

जीवन में आगे बढ़ना है तो सहयोग की भावना रखें!

   " मेरे पिताजी कहते हैं कि अपना सुख बाद में देखो, पहले दूसरे का दर्द देखो तथा उसे कोई तकलीफ ना हो! मेरे पिताजी ने ईमानदारी से काम करने व मुश्किलों से विचलित नहीं होने की सीख दी है! उन्होंने सिखाया है की किसी से उम्मीद न रखो, सुखी रहोगे!"
          
 जीवन हमेशा एक समान नहीं होता है! प्रत्येक स्तर पर बहुत से उतार-चढ़ाव आते हैं और उन उतार-चढ़ाव के बीच सदैव सफलता की आशा करना हमारी भूल है! यही कारण है कि जीवन के हर मोड़ से व्यक्ति कुछ ना कुछ सीखता है, चाहे उसे कामयाबी मिले या फिर नाकामयाबी!
              
जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमारे द्वारा किए गए प्रयासों तथा पहले से उचित कार्य योजनाओं के निर्माण और स्वयं की योग्यता पर विश्वास होने के बावजूद असफलता हाथ लगना अपने आप में असहनीय घटना होती है! किंतु अपनी असफलताओं पर यदि हम अपना ध्यान केंद्रित करें तो हम पाएंगे कि किसी से सहयोग ना लेना और जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास होना, असफल होने के मूल कारणों में से यह एक है! 

जीवन में स्वयं की प्रगति, विकास, आवश्यक तत्वों की पूर्ति और हर क्षेत्र में प्रभावी व्यक्तित्व बनाए रखने के लिए परस्पर सहयोग की भावना आवश्यक होती है!



    
         सहयोग लेने और देने की भावना व्यक्ति को विभिन्न समस्याओं और चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करती है! सहयोग के प्रति अपना सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए पहले यह तय कर लेना आवश्यक है कि हमें जीवन में आगे बढ़ने के लिए किससे सहयोग लेना है अथवा किस को सहयोग देना है! फिर उसी के अनुसार हमें अपनी कार्य योजनाओं को आगे बढ़ाना चाहिए!
      
कई बार हम सहयोग के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण अपना लेते हैं और यह मान बैठे हैं कि हमें लोगों से सहयोग लेने की आवश्यकता नहीं है! हम इतने कमजोर नहीं है कि हमें अपना कार्य पूरा करने के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़े! सहयोग के प्रति हमारे इस प्रकार के नकारात्मक और हीन भावना से ग्रस्त विचार हमारी ही प्रगति में बाधक होते हैं!
         
 इस बात में कोई संदेह नहीं कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र चाहे घर हो या बाहर सामाजिक कार्यों या धार्मिक, सामान्य कार्य हो, विशिष्ट व्यक्ति बगैर सहयोग के अकेला उसे पूरा करने तथा उसमें सफल होने में असमर्थ होता है क्योंकि जहां मनुष्य की पहुंच होती है वहां सहयोग की अपेक्षा होती ही है! ऐसे में हम अनेक व्यक्तियों एवं से अपना संबंध स्थापित करते हैं किंतु कुछ समय के पश्चात हमें ऐसा आभास होने लगता है कि वह हमारे सहयोगी ना होकर प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से हमारे कार्यों में बाधक होता है!
   
        असफल होने पर प्रोत्साहित करने, मनोबल को बढ़ाने, धर्य देने वाले सहयोग, हमारी उन्नति के लिए सहायक होते हैं! इस प्रकार का सहयोग हमें आगे बढ़ने, कार्य करते रहने और निरंतर प्रयास करते रहने की प्रेरणा देती है! 
        यही सहयोग संघर्ष में हमारे गिरे हुए मनोबल को आगे बढ़ाता है तथा सहयोग हमारी स्थिति को नियंत्रित ही नहीं करता बल्कि हमें शक्ति भी प्रदान करता है!
                                  
( BEST OF LUCK FOR THE NEW LIFE.)
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