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Thursday, 26 December 2019

अपनी शक्तियों को पहचाने!

    

अपनी शक्तियों को पहचाने!

प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्मों की कलम से अपनी किस्मत की कहानी खुद ही लिखता है और अपने आत्मविश्वास के द्वारा अपनी प्रतिकूलताओं को भी अनुकूलताओं में बदल लेता है! कुछ पाने के लिए मेहनत और संघर्ष करना जरूरी है लेकिन लोग वही नहीं करना चाहते हैं!
           
 किसी भी क्षेत्र की उपलब्धि और जीवन जीने की कला दोनों ही अपने बारे में सही ज्ञान पर निर्भर करता हैं! इसलिए हर व्यक्ति के लिए यह आवश्यक है कि वह अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए अग्रसर होने से पहले अपनी शक्तियों और योग्यताओं के बारे में जान ले! दरअसल होता यह है कि हम जब भी अपनी उपलब्धियों का लक्ष्य निर्धारित करते हैं, तब हम अपनी शक्तियों और योग्यताओं या क्षमताओं का अनुमान नहीं लगाते बल्कि इसके विपरीत हम 'ओवर कॉन्फिडेंस' हो जाते हैं!
              
     अक्सर हम देखते हैं कि प्रतियोगी परीक्षा हो या कोई भी क्षेत्र हो 'ओवर कॉन्फिडेंस' के कारण लोग मुंह के बल गिरते हैं और जब हम असफल हो जाते हैं तो अपनी असफलता का दोष किसी और पर लगाते हैं!
      
किसी मनुष्य के पास बल, विद्या, बुद्धि, वैभव सब कुछ है परंतु यदि वह परिश्रम से जी-चुराता है तो निश्चय ही वह ऐसी महान शक्ति से वंचित हो जाता है जिसके अभाव में मनुष्य का सारा जीवन व्यर्थ हो जाता है! परिश्रम जैसी महान शक्ति का सहारा ना पाकर मनुष्य की कार्य शीलता बेकार हो जाती है! संसार के सारे महान कार्य परिश्रम द्वारा ही संपन्न हुए हैं! परिश्रम ने ही संसार के महान लोगों को ऊंचा उठाया है!

अतः मानव जीवन में परिश्रम का महत्वपूर्ण स्थान है तथा बिना परिश्रम के कोई भी कार्य संभव नहीं हो सकता! कल्पनाओं की उड़ान भरने एवं विचारों की दुनिया में अपने काल्पनिक विचार से कोई भी व्यक्ति अपने जीवन को सफल नहीं बना सकता!


       
वैज्ञानिकों का कहना है कि एक औसत आदमी अपनी मानसिक शक्ति का केवल 20% ही इस्तेमाल करता है! जरा आप अपने बारे में सोचिए कि अगर आप एक औसत आदमी है तो आप अपनी मानसिक शक्ति का केवल 20% यानी पांचवा हिस्सा ही इस्तेमाल करते हैं और बचे हुए शक्ति को बेकार जाने दे रहे हैं! अतः यह भी सोचिए कि अगर आप अपनी मानसिक शक्ति का 50% प्रयोग करने लगे तो आप अपनी जिंदगी को कितना सुंदर बना सकते हैं!
       
      विश्व की जितनी भी महान लोग हैं, सभी ने परिश्रम के हथौड़े से अपने जीवन को ठोक- पीटकर मजबूत बनाया है! उन्होंने अपने ही हाथों अपनी महानता के बीज बोए हैं! दूसरे शब्दों में कहा जाए तो जब हम अपने मस्तिष्क और मन की शक्तियों को जान लेते हैं तो असफलताओं के अपने इतिहास को हम स्वयं ही मिटा देते हैं! इसलिए हमें तमाम बेकार की बातों से ध्यान हटाकर अपनी मानसिक दशा की ओर ध्यान देना चाहिए और स्थितियों की जांच करके अपने आपको जानना चाहिए! जब आप अपनी शक्तियों को जान लेंगे तभी तो उनके साथ आगे बढ़ सकेंगे!
परिश्रम को दोष देना, जीवन के लिए भार स्वरूप समझना हमारी कायरता है! परिश्रम ही हमारी सफलता की कुंजी(Key) है! अतः हमें भी इस कुंजी(Key) के द्वारा अपने जीवन की सफलता का द्वार खोलना चाहिए!

(Best Of Luck For the New Life.)
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